―आशा का परित्याग कर उसको ईंधन के रूप मे प्रयोग कर मनके अहंकार को जला कर भस्म कर दूँ और योगी बनकर संसार से विरक्त होकर परमात्मा की खोज मे इधर-उधर चक्कर काटता रहूँ। इस प्रकार अच्छे कर्मों रूपी सूत को कात करके ही परमात्मा की प्राप्ति सम्भव हो सकती है। विशेष―रूपक अलंकार।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ―सासारिक चिन्ताओ को छोड़ देने से परमात्मा स्वयं ही प्राप्त हो जाता है। आसा का ईंधण करूॅ, मनसा करूॅ विभूति। जोगी फेरी फिल करौ, यौं बिननाँ वै सूति॥
Kabir 13.3
Audio
Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―सत्कर्मों के द्वारा ही ब्रह्म को प्राप्त किया जा सकता है।