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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

संदर्भ―कर्मों के अनुसार ही फल की प्राप्ति होती है। काया देवल मन धजा, बिषै लहरि फहराइ। मग चाल्यां देवल चलै, ताका सर्बस जाइ॥

Kabir 13.28

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

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―शरीर रूपी मन्दिर है और उसके ऊपर फहराने वाली ध्वजा मन है। और ध्वजा विषय वासना की चंचल वायु लहरो से फहरने लगती है यदि शरीर रूपी मंदिर मन रूपीध्वजा के कहने से चलायमान हो जाता है तो समझ लेना चाहिए कि उसका सर्वस्व नष्ट हो जायगा।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―मन के अनुसार कार्य करने पर सर्वस्व नष्ट हो जाता है।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

देवल―देवालय, मन्दिर। धजा=ध्वजा। विशेष―सागरूपक।