―भक्ति के मार्ग का दरवाजा इतना सकीर्ण है कि वह राई के दशमाश के बराबर है और उसमे प्रवेश करने वाला मन मदमस्त हाथी के समान है फिर वह उस भक्ति के मार्ग में प्रवेश कैसे पा सकता है?
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ―मन रूपी पक्षी माया के प्रभाव से नीचे गिर पड़ता है। भगति दुबारा संकड़ा, राई दुसवैं भाइ। मन तो मैंगल ह्वै रहयो; क्यूॅ करि सकै समाइ॥
Kabir 13.26
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
―मैंगल=मद मस्त हाथी।