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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

​ संदर्भ―मन सयमित होने पर भी वासना के अवशेष से विकार ग्रस्त हो जाता है। कबीर मन पंषी भया; बहुतक चढ़्या अकास। उहाँ ही ते गिरि पड़्या; मन माया के पास॥

Kabir 13.25

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Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―ईश्वर को प्राप्त करने के लिए कबीरदास कहते हैं कि मेरा मन पक्षी की भाँति आकाश तक शून्य तक विचरण करने गया था किन्तु माया के प्रभाव से जब वह वहाँ से गिरा तो बीच मे कही रुका हो नही ठीक नीचे आकर माया के पास ही गिरा। विशेष―रूपक अलंकार।