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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

संदर्भ―मन मरे हुए आदमी की भाँति मरी हुई अवस्था में भी जीवित रहता है। काटी कूटी मछली छीकै धरी चहोड़ि। कोई एक अपिर मन बस्या; दह में पड़ी बहोड़॥

Kabir 13.24

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―मन रूपी मछली को काट कूटकर किसी प्रकार विषय वासना से रहित कर अपने वश मे करके शून्य रूपी छीके मे रखा था किंतु इतने पर भी उसमे वासना का कोई अक्षर अवशिष्ट रह गया था इसलिए वह मन रूपी मछली साधना के छीके से पुनः वासना के जल मे आकर गिर पड़ी। मन फिर विषयो मे आसक्त हो गया।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―मछली=मन। दह=तालाव, ससार पक।