―साधक को अपने मन पर पूर्णरूपेण विश्वास नहीं है वह कहता है कि जिस प्रकार मनुष्य मर जाता है उसी प्रकार मैंने अपने मन को विषयो की ओर से मृतक तुल्य बना दिया है किन्तु फिर भी यदि इसके पास विकारो को दुदंभी फिर से वजने लगे तो जीवित व्यक्ति के समान पुनः पाप कर्म करने लगता है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ―मन ब्रह्म की ओर उन्मुख होकर भी माया भिभूत हो जाता है। मृतक कूॅ धीजौं नहीं, मेरा मन बीहै। बाजै बाव बिकार की, भी मूवा जीवै॥
Kabir 13.23
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
―वाव=दुदुंभी। विकार=सासारिक विषय। मूवा=मृतक।