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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

सौंदर्भ―मन को सयम रूपी अंकुश से मार देना चाहिए। मैमंता मन मारि रे, नॉन्हाँ करि करि पीसि। तव सुख पावै सुंदरी, ब्रह्म झलकै सीसि॥

Kabir 13.20

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―मदमस्त हाथी रूपी मन को संयम के द्वारा इतना कस कर मारो कि सूक्ष्मता को प्राप्त हो जाय। कर्मों को बारीक आटे की तह पीसना चाहिए। तभी आत्मा रूपी सुन्दरी को सुख प्राप्त होगा और सिर से ब्रह्म ज्योति का प्रकाश छिटकता रहेगा । ​ शव्दार्थ―पुन्दरी=आत्मा।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―मन को वश मे करने से ही ब्रह्म ज्योति का प्रकाश मिलेगा।