Sant Seva ParishadSant Seva ParishadSSP · sant seva

Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

चिंता चिति निबारिये, फिरि बूझिये न कोइ। इंद्री पसर मिटाइये, सहजि मिलैगा सोइ॥

Kabir 13.2

Audio
Translations & commentaries(1)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―अपने मन से संसार की नाना प्रकार की चिन्ताओ को त्याग देने पर फिर किसी की भी परवाह नही रहती है। इन्द्रियो से उत्पन्न विषय वासना रूपी सुख के फैलाव को समाप्त कर देने पर वह परमात्मा बड़ी ही सरलता से प्राप्त हो जाता है। शव्दार्थ―चिन्ता=सासारिक चिन्ताएँ। सहजि=आसानी से।