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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

सौंदर्भ―मन विषय वासना मे पड़ कर अपना सर्वस्व ही गंवा बैठा है। मैमंता मन मारि रे, घटहीं मांहै घेरि। जबहीं चालै पीठि दे, अंकुस दे दे फेरि ॥

Kabir 13.19

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

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हे जीव! तू अपने मदमस्त मन को अपने हृदय के भीतर ही घेर कर मार दे। और जब भी यह परमात्मा से विमुख होकर इधर-उधर भागने का प्रयत्न करे उसी समय ईश्वर-स्मरण और सयम का अकुश लेकर इसको उचित मार्ग पर लगा देना चाहिए

Padārtha Word-meaning

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मैमत्ता=मदमस्त हाथी। घटही माहै―हृदय के अन्तर से। विशेष―अनुप्रास और रूपक अलंकार।