―यह मन विषयों के स्वाद मे इतना रमण करने लगा है कि पल भर मे हो करोडो दुष्कर्म कर डालता है। और सतगुरु द्वारा दिये गए उपदेशो की अवहेलना करके व्यर्थं मे ही जीवन को नष्ट कर डाला है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
सौंदर्भ―मनको सांसारिक विषय भोगो के बदले नरक मे यातनाएं भोगनी पढ़ेगी। कोटि कर्म पल मैं करै, बहु मन विषिया स्वादि। सतगुर सबद न मानई, जनम गॅवाया बादि॥
Kabir 13.18
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
―सबद=शब्द। बादि = व्यर्थं।