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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

संदर्भ―मन इन्द्रियो के वश में हो गया है अब वह काबू मे नही आ सकता। कबीर मन गाफिल भया, सुमरिण लागै नाहिं। घणीं सहैगा सासनां, जम की दरगह माहिं॥

Kabir 13.17

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―कबीरदास जी कहते हैं कि नाना प्रकार की विषय-वासनाओ के पीछे दौडते-दौडते मन इतना गाफिल हो गया है कि ईश्वर के नाम-स्मरण मे उसका मन ही नही लगता है। किन्तु उसे अपने इन पाप कर्मों का भोग यमलोक मे जाकर यातना सहकर सहना पड़ेगा।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―घणी=अत्यधिक। साँसना=यातनाएं। दरगह=दरबार।