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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

मन न मर्या मन करि, सके न पच प्रहारि। सील साच सरधा नहीं, इन्द्री अजहुॅ उधारि॥

Kabir 13.15

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―हे जीव! तूने न तो मन को वश मे किया है और न काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह को ही प्रहार कर नष्ट किया है। शील, सत्य, और श्रद्धा आदि सद् गुणो का भी लोप हो गया है। कबीरदास जी कहते हैं कि यदि मन इन्द्रियो पर आज भी अपनापूर्ण अधिकार कर ले तो उसका भवसागर से उद्धार हो सकता है, अन्यथा नही।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―मन करि=संकल्प कर। पंच―काम, क्रोध, मद, लोभ और मोह।