मैंने एक ऐसा मित्र बनाया है कि जिसके गले मे लाल कपडा बंधा हुआ है अर्थात् जो प्रेम के रग से ओत-प्रोत है। यह प्रेम का रंग इतना पक्का है कि संसार के सब धोवी मिल करके भो यदि इसके रंग को धोकर छुडाना चाहें तो नहीं छुड़ा सकते हैं।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ―मन को वश मे करने पर ही उच्चतम स्थान मिलता है। एक ज दोसत हम किया, जिस गलि लाल कबाइ। सब जग धोबी धोई मरै, तौ भी रंग न जाय॥
Kabir 13.11
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―प्रेम का रंग किसी के छुडाए नहीं छूटता है।
Padārtha — Word-meaning
―कबाइ=कपडा।