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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

आसा एक जु राम की, दूजी आस निराम। पाँणी माँहै घर करैं, ते भी मरैं पियास॥

Kabir 11.9

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―जिसको एक परमात्मा की आशा है उसके लिए अन्य आशाएँ व्यर्थ हैं निराशामात्र है क्योकि उसी एक से सबकी प्राप्ति होती है। सांसारिक कामनाओ का अन्त तो निराशाएँ होता है। जो व्यक्ति ईश्वर की आशा को छोड़ कर अन्य की आशा करते हैं वह तो उन लोगो के समान है। जो पानी में रहकर भी प्यासे मरते हैं।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―जीव को सासारिक आशाओं के प्राप्त होने पर भी शांति प्राप्ति नही होती है।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―पाणी=जल।