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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

जब लगि भगति सकांमता, तब लगि निर्फल सेव। कहै कबीर वै क्यूॅ मिलै, निहकांमी निज देव॥

Kabir 11.8

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

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―जब तक भक्ति मे कामना मिली होती है किसी स्वार्थ के लिए ईश्वर का स्मरण किया जाता है तब तक ईश्वर की सम्पूर्ण सेवा व्यर्थ होती है। कबीरदास जी कहते हैं कि जो ईश्वर निष्काम है उसे तो निष्काम भक्ति से हो प्राप्त किया जा सकता है साम भक्ति से यह कैसे मिल सकता है?

Bhāṣya Commentary

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―भक्ति कामनारहित होनी चाहिए।

Padārtha Word-meaning

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―सकीमता=कामनामय। निर्फल=निष्कल निहकामी= निष्कामी।