―कबीरदास जी कहते हैं जिसने एक परमात्मा को नहीं जाना उसका और सव ज्ञान क्या होगा। वह व्यर्थ है। उस एक परमात्मा के ज्ञान से तो और सभी ज्ञान प्राप्त हो जाते हैं कि और सब ज्ञानो से उस परमात्मा का ज्ञान नहीं होता है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर एक न जाँणियाँ, तौ बहुजाँण्याँ क्या होइ। एकै तैं सव होत है, सवतैं एक न होइ॥
Kabir 11.7
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―सच्चा ज्ञान ब्रह्मज्ञान है। उससे अन्य ज्ञान प्राप्त होते हैं।
Padārtha — Word-meaning
―एक=परमात्मा। बहु=अन्य समस्त ज्ञान।