―कबीरदास जी कहते हैं कि यदि मुझे नरक मे भी जाना पढे और वहाँ पर मुझे परमात्मा के दर्शन न होता रहे तो मुझे कोई भय नही है। किन्तु ऐप्रितम! तेरे बिना यदि मुझे स्वर्ग मे भी जाना पडे, तो वह भी मेरे लिए त्याज्य है,व्यर्थ है। शब्दार्थ―दो जग=दो जख-वर्क। मिस्न=बहिश्त-स्वर्गं। वाँझ=रहित है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
दो जग तौ हम ॲगिया,यहु डर नाहीं मुझ। भिस्त न मेरे चाहिए, बांँझ पियारे तुझ॥
Kabir 11.5