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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर सुख कौं जाइ था,आगे आया दुख। जाइ सुख घरि आपणै,हम जाणै अरु दुख॥

Kabir 11.4

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―कबीरदास जी कहते है कि इस विषय विकार से भरे हुए संसार के सुखो मे लिप्त होने जा ही रहा था कि अचानक मेरा साक्षात्कार परमात्मा के विरहरुपी दुख से हो गया। तब मैंने सांसारिक दुखों को तिमाजलि देकर ईश्वर की प्राप्ति के लिए विरह(दुख) को ही सहने का लक्ष्य बनाया है।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―साधक परमात्मा की प्राप्ति के लिए सासारिक सुखो को तिलाजलि दे देता है।