―कबीरदास जी कहते हैं कि समुद्र मे पड़ी हुई सीपी उसके जल से तृप्त न होकर प्यास रठती रहती है। वह तो स्वाति नक्षत्र के बूँद को आशाएँ विशाल समुद्र को तिनके के समान नगण्य समझती है। विशेष―अन्योक्ति अलंकार।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
मेरा तुझ में कुछ नहीं, जो कुछ है सो तेरा। तेरा तुझको सौंपता, क्या लागै मेरा॥
Kabir 11.3
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―जिसका जिसमे प्रेम होता है उसके लिए उससे बढकर और कोई पदार्थ नही होता है।
Padārtha — Word-meaning
―समदहिं=समुद्रहि=समुद्र को।