―हे प्रियतम! तुम नेत्रो के अन्दर आजाओ और मैं तुरन्त नेत्रो को मूँदलूँ। जिससे न तो मैं ही तुम्हारे अतिरिक्त किसी अन्य को देख सकूं और न तुम को ही अपने अतिरिक्त किसी अन्य को देखने दूँ। तुम् मुजे देखो और मैं तुमे देखूँ। सब्दार्थ―अंतरि=अन्दर। झंपेड=मूँदलूँगा।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
सन्दर्भ―साधक केवल परमात्मा से प्रेम करता है। नैनां अन्तर आवतूॅ, ज्यूॅहौ नैन भैपेउ। नाँ हौं देखौं और कूॅ, नांतुझ देखन देउॅ॥
Kabir 11.2
Audio
Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―प्रेम की अनन्यावस्था को दिखाया गाया है। भक्त प्रेम मे विभोर होकर अपने प्रियतम को ही देखना चाहता है।