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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

संदर्भ―भक्ति पर यदि आपत्ति आयेगी तो ईश्वर के लिए लज्जा का विषय है। धरि परमेसुर पाहुणां, सुणौं सनेही दास। षटरस भोजन भगति करि ज्यूॅ कदेन छाँड़ै पास॥

Kabir 11.16

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

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―कबीर दास जो कहते हैं कि है प्रेमो भक्तो। ध्यान पूर्वक सुनो इस हृदय रूपी घर मे प्रभुरूपी अतिथि पधारे हैं। उसकी सेवा मे भक्ति रूपी षट् रस व्यंजन प्रस्तुत करो ता कि वे प्रसन्न हो कर कभी भी तुम्हारा साथ न छोड़े। सदैव तुम्हारे साथ रहे। विशेष―रूपक अलंकार।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―घरि=घर। पाहुणाँ=अतिथि।