―कबीरदास जी कहते हैं कि मैं राम का कुत्ता हूँ और मेरा नाम मुतिया (मुक्त) है मेरे गले में राम नाम की रस्सी पड़ी हुई है उस रस्सी को पड़ कर मेरे स्वामी राम जिधर मुझे घुमाते हैं मैं उधर हो घूम जाता हूँ। विशेष―रूपक अलंकार।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर कूता राम का, मुतिया मेरा नाँउॅ। गलै राम की जेवड़ी, जित खैंचे वित जाँउॅ॥
Kabir 11.12
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―भवत को भगवान जिधर खीचता है वह उधर ही चला जाता है।
Padārtha — Word-meaning
―कूता=कुत्ता। जेवडी=जेवरी=रस्सी।