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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

​ जें मन लागै एक सूँ, तौ निरबाल्या जाइ। तूरा दुइ मुखि बाजरणँ, न्याइ तमाचे खाइ॥

Kabir 11.10

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―यदि जीव का मन परमात्मा पर ही आसक्त हो जाय तो उसका निर्वाह हो जायगा और यदिवह ईश्वर के अतिरिक्त अन्य का ध्यान करता है तो उसे सांसारिक दुख उसी प्रकार सहन करने पड़ेगे जिस प्रकार तुरही को दोमुखों से बजने के कारण अकारण ही हाथ के प्रहार सहन करने पड़ते हैं। शव्दार्थ―निरवाल्या=निर्वाह हो जाएगा। तूरा=तुरही। न्याइ=उचित।बाजणाँ=बजाने से।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

―जीव को अकेले परमात्मा के प्रेम मे मन को लगा देना चाहिए।