―हे अनन्त गुणो वाले प्रियतम(ब्रह्मा)। कबीर का एकमात्र तुझ से ही प्रेम है। यदि मैं तुझे छोडकर अन्य किसी से हँस बोलकर प्रेम करुँ तो वह मुँह पर स्याही लगाकर मुँह को कलकित करने के समान है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर प्रीतड़ी तौ तुझसौं, बहु गुण याले कन्त। जे हॅसि बोलौ और सौं, तौ नील रॅगाऊॅ दन्त॥
Kabir 11.1
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
प्रीतड़ी=प्रेम। गुणिया ले=गुणवान्।