―उडा और पिंगला नाडियाँ हृदय गंगा और यमुना के समान प्रवाहित हो रही है शून्य मे ध्यान रूपी घाट है। उसी शून्य स्थान मे कबीर दास ने अपने मन को लगा दिया है। मुनि लोग उस स्थान के लिए प्रतीक्षा ही करते रहते हैं।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
गंग जमुना उर अंतरै, सहज सुनि ल्यौ घाट। तहाँ कबीरै मठ रच्या, मुनि जन जोवैं बाट॥
Kabir 10.3
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―जिस स्थान तक पहुँचने के लिए। मुनि लोग प्रतीक्षा किया करते हैं वही पर कबीर दास ने अपने मन को साधना मे लगा दिया है।
Padārtha — Word-meaning
―गंग यमुन=इडा पिंगला। ल्यौ=ध्यान।