―जिस बन मे सिह् नही पहुँच सकता पक्षी भी जहाँ उड़ नही सकते जहाँ रात्रि और दिवस का भी पता नही। सूर्य और चन्द्र्मा का अस्तित्व नही। उस न्थान तक पहुचने के लिए कबीरदास साधना कर रहे हैं।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
जिहि बन सीह न संचरै, पंषि उड़ै नहीं जाइ। रैनि दिवस का गमि नहिं,तहाँ कबीर रह्या ल्यौ लाइ॥
Kabir 10.1
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
―अगम्य प्रभु की प्राप्ति के लिए द्त्तचित होकर साधना मे लीन होना चाहिए।
Padārtha — Word-meaning
―सीस=सिंह। रैन दिवस=रात दिन अर्थात सूर्य और चन्द्रमा।