- सतगुरु ने शक्तिभर शिष्य को लक्ष्य करके वाण मारा। फलता शिष्य के शरीर मे दावाग्नि भी प्ररफुटित हो गई और शिष्य के अगो को उदघाटित करने लगा। विशेष--(१) मार्या वाण भरि से तात्पयं यह है कि सतगुरु ने पूर्ण्शक्ति के साथ वाण मारा। (२) घरि--मूठि-ल साघन करके। (३) अगि- लागिया सातगुरु के शऱीर वाणो ने शिषय के अगो को उदघाटित कर दिया। अर्थात शब्द वारगा ने ममं को आहन कर दिय। (४) गई-फूटि-शब्द वाण के फलतः ज्ञान कि अग्नि दावाग्नि से फैल गई औऱ उसने व्यक्तित्व के असर तत्वो की विनष्ट कर दिया।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
सतगुरु मारया बाण भरि धरि करिसूधी मूठि। श्रंगि उघाडै लागिया,गई दवा सूँ फूटि़॥
Kabir 1.8
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
'-भरी पुरी शक्ति के साथ। सूघी= सूघे। दवा=दावाग्नि।