सतगुरु सच्चा शूरवीर है। उसने मेरे प्रति एक ऐसे शब्द-बाण का अनुसंधान किया, किसके प्रभाव से मेरा मर्म आहत हो गया और मैं मेरा खोया हुआ अपनत्व मुझे सम्प्राप्त हो गया। विशेष—शब्द बाण के लगते ही मेरा खोया हुआ अपनत्व प्राप्त हो गया। तात्पर्य है कि मैं जो माया के आकर्षक स्वरुप को देखकर आत्म विस्मृत हो गया था, सतगुरु के शब्द बाण के लगते ही पुनः आपने खोये हुए रूप को प्राप्त हो गया। मैं माया से आवृत्त होने के कारण अपने निर्विकार एवं निराकार स्वरुप को बिसर गया था पर सतगुरु को ऊपर से ज्ञान प्राप्त हुआ और मैं पुनः अपने मौलिक रूप में परिवर्तित हो गया। पड्या कलेजे छेक से तात्पर्य है कलेजा (पर मर्म) आहत हो गया शब्दार्थ-साचा=सच्चा।सूरिर्वा=शूरमा।सवद=शब्द वायह =वहाया,फॅका । लगते। पडयाा=पडा-हुआ। छेक प्रभाव डालना।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
सतगुरु साँचा सूरिवाँ, सबद जु बाह्या एक। लागत ही मैं मिल गया, पड्या कलेजै छेक॥
Kabir 1.7
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
प्रस्तुत साखी में सतगुरु की एक और विशेषता का उल्लेख किया है। वह सच्चा सूरमा है। उसक लक्ष्य अचूक और अत्यन्त प्रभावशाली है। उसका बाण शब्द-बाण है। शब्द-बाण ने शिष्य के मर्म को आहत कर दिया है।