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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

संदर्भ—शिष्य के मन में असीम कृतज्ञता की भाव है। वह सतगुरु के प्रति प्रतिदान की इच्छा रखता है, पर गुरुदेव के प्रति क्या समर्पित किया जाय यह संकल्प विकल्प मन में साकार रहता है। उसकी अभिलाषा अपूर्ण ही रह गई। सतगुर के सदकै करूँ दिल अपणीं का साछ। कलियुग हम स्यूँ लड़ि पड़या मुहकम मेरा बाछ॥

Kabir 1.5

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

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अपने हृदय की समस्त सत्यता को साक्षी करके, पूर्ण मनोयोग से मैं सद्गुरु के चरणों में अपने को न्यौछावर करता हूँ। कलियुग ने पूर्ण शक्ति के साथ मेरे प्रति आक्रमण किया परन्तु मेरी बाधाएँ बलशालिनी थी। अतः मैं सद्गुरु की कृपा से भवसागर उत्तीर्ण हो गया।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

सदकै = सिर का—बलि जाऊँ, न्यौछावर जाऊ। दिल = हृदय। स्यूँ = से। पड़या = पड़ा। मुहकम = प्रवल, बलशाली। बाछ = वाँछा, अभिलाषा। ​ सतगुरु लई कमांण करि, बांहण लागा तीर॥