-चौराहे पर चौपड़ सुशोभित है । ऊपर नीचे बाजार लगा हुआ कबीर कहते हैं कि सतजन । विवेक पुर्वक इम चौपड के खेल को खेलो । विशेष--अरध बाजार ऊपर नीचे चक्रो का बाजारा बिछा हुआ ही शरीर मे पटचक्र है । मूलाचार प्रथम और सहखार अतिप चक्र है ध्यान रुपी मोहरें या गोटो से साधक खेल रहा है प्रत्येक चक्र पर ध्यान केन्द्रिन करके पुन: आगे बढ़ता है । (२) चौपडि... चोहट शरीर रूपी चौरहे पर चौपड बिछी है । खेलौ सत विचार से तात्पर्य है कि सतो ध्यान पूर्वक इस खेल को खोलो ।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ—सतगुरु के अमोघ दान के फलतः जीवन में सब कुछ सब प्राप्य उपलब्ध हो गया। दुर्लभ ब्रह्मानुभूति प्राप्त हो गई। भवसागर में भटकती हुई जीवन नौका को लक्ष्य एवं गंतव्य प्राप्त हो गया ब्रह्मा की अनुभूति का आनन्द अविभाज्य एव अभिव्यक्ति से परे हैं या असम्प्रेषणीय है। चौपडि मांड़ी चौहटै, अरध उरध बाजार । कहै कबीरा रामजन, खोलौ संत विचार ॥
Kabir 1.30
Audio
Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
-माँडी = मडित । चौहटे = चौराहे । अरध अरध = ऊपर-नीचे ।