सतगुरु की महिमा अनन्त है। उनकी महत्ता का वर्णन नहीं हो सकता है। उन्होंने शिष्य के प्रति अनन्त उपकार किए हैं। उन्हीं की असीम कृपा से अनन्त अर्थात-ज्ञान के चक्षु उद्घाटित होगा। उनकी असीम कृपा से अनंत, निराकार निर्विकार ब्रह्म के दर्शन हो गए।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
सतगुरु की महिमा अनँत अनँत उपकार। लोचन अनँत उघाड़िया अनँत दिखावण्हआर॥
Kabir 1.3
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
अनंत = अनन्त, असीम। उपगार = उपकार। लोचन = नयन। उघाड़िया = उघाड़, उद्घाटित किया। दिखावण्हार = दिखावनहार = दिखाने वाला।