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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

सतगुरु की महिमा अनँत अनँत उपकार। लोचन अनँत उघाड़िया अनँत दिखावण्हआर॥

Kabir 1.3

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

सतगुरु की महिमा अनन्त है। उनकी महत्ता का वर्णन नहीं हो सकता है। उन्होंने शिष्य के प्रति अनन्त उपकार किए हैं। उन्हीं की असीम कृपा से अनन्त अर्थात-ज्ञान के चक्षु उद्घाटित होगा। उनकी असीम कृपा से अनंत, निराकार निर्विकार ब्रह्म के दर्शन हो गए।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

अनंत = अनन्त, असीम। उपगार = उपकार। लोचन = नयन। उघाड़िया = उघाड़, उद्घाटित किया। दिखावण्हार = दिखावनहार = दिखाने वाला।