Sant Seva ParishadSant Seva ParishadSSP · sant seva

Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

माया दीपक नर पतंग, भ्रमि-भ्रमि इवैं पडन्त। कहै कबीर गुर ग्यान थैं, एक आध उतरन्त॥

Kabir 1.20

Audio
Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

माया रूपी दीपक पर नर (रूपी) पतंग, मंडरा-मंडरा कर गिरता है। परन्तु कबीर का मत है कि गुरु के ज्ञान से (इस विनाश से) एक आध उतर जाता है या उद्धार भी प्राप्त करता है। ​ विशेष—माया के आकर्षक स्वरूप पर मानव उसी प्रकार भ्रम के कारण, या अज्ञान के कारण मडला-मडला कर गिरता है, यथा दीप-शिखा पर पतंग आकर्षित होकर प्राण अर्पित कर देते हैं। (२) "एक आध" से तात्पर्यं विरले। (३) प्रस्तुत साखी में अप्रत्यक्ष रूप से सतगुरु की सामर्थ्य की प्रशंसा की गई है। वह सर्वथा स्तुत्य और बंदनीय है।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

पूर्वं साखी में प्रयुक्त अप्रस्तुत योजना "दीपक दिष्टि पतंग ज्यूँ" को और भी विस्तार तथा स्पष्टता के साथ व्यक्त करते हुए कवि ने गुरु के ज्ञान के समक्ष पुनः श्रद्धा, आस्था तथा विश्वास प्रकट करते हुए अप्रत्यक्ष रूप से गुरु की महत्ता का वर्णन किए हैं।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

पडंत = पड़ते हैं। उबरंत = उबरते हैं।