Sant Seva ParishadSant Seva ParishadSSP · sant seva

Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कबीर गुर गरवा मिल्या, रलि गया आटै लूण। 'जाति पाँति कुल सब मिटे, नाँव धरौगे कौंण॥

Kabir 1.14

Audio
Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

कबीर कहते हैं गौरवमय तथा गम्भीर गुरु मिला। गुरु ने अपने व्यक्तित्व में मुझे एकाकर लिया। मैं उससे मिलकर उसी प्रकार अभिन्न हो गया, यथा आटा एवं नमक मिलकर अभिन्न हो जाता है। इस प्रकार सतगुरु के व्यक्तित्व में एकाकार हो जाने की अनन्तर जाति, कुल और नाम की सकरी सीमाएँ विनष्ट हो गई और मैं विशुद्धात्मा हो गयी। ऐसी शुद्धात्मा का क्या नामकरण होगा? विशेष—आटै-लूण मे तात्पर्य है यथा आटा में मिलकर नमक एकाकार हो जाता है। उसी प्रकार सतगुरु की महानात्मा से मिलकर शिष्य की आत्मा एकाकार हो गई। (२) "गुरगरवा" से तात्पर्य है कि ज्ञान के गौरव मे पूर्ण और गम्भीर (३) जाति... कौंण से तात्पर्य है सांसारिक एवं सामाजिक मान्यताएँ एवं प्रतिबिम्ब एवं विनष्ट हो गये। शिष्य शुद्धात्मा हो गया। (४) नाव... कौंण से तात्पर्य है कि अब शिष्य अनाम, अजात, अवर्ण और अभेद हो गया।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

लूण = लीन-नमक। गरवा गरजा—गम्भीर। ताष = नाम। कौंण = कौन। ​