गोविन्द की कृपा से मुझे ग्यान के आलोकित या प्रकाशित गुरु मिला। ऐसा सतगुरु अविस्मरणीय है। विशेष—कबीर का यदि यह विश्वास है कि "गुरु गोविन्द दोऊ खड़े काके लागूं पाँय। बलिहारी गुरु आपने जिन गोविन्द दियो बताय," "तो वही कबीर यह भी रखते हैं कि" "जब गोविन्द कृपा करी, तब गुर मिलिया आइ। कबीर को इस बात की प्रसन्नता है कि उसका गुरु ग्यान से पूर्ण और ईश्वर की कृपा से प्राप्त हुआ है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
ग्यान प्रकारया गुर मिल्या, सो जिनि वीसरि जाइ। जब गोविन्द कृपा करी, तब गुर मिलिया आइ॥
Kabir 1.13
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
ज्ञान से सुशोभित एवं समलकृत गुरु की प्राप्ति एवं दर्शन बड़े भाग्य से होते है। ऐसे महान के दर्शन के भी ईश्वर की प्रेरणा और अनुकप का फल है। इस प्रकार का असाधारण, अद्भुत और अद्वितीय व्यतित्व अविस्मरणीय है।
Padārtha — Word-meaning
प्रकास्या = प्रकासा = प्रकाशा = प्रकाशित। गुर = गुरु। मिल्या = मिला। जिनि = जिन। मत = नहीं। बीसरि = बीसरा = बिसरा = भूला। मिलिया = मिला।