Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
लागलिया मुख स्तनां । घाली पान्हा माउली ॥1॥ उभयतां आवडी लाडें । कोडें कोड पुरतसे ॥ध्रु.॥ मेळवितां अंगें अंग । प्रेमें रंग वाढतो ॥2॥ तुका ह्मणे जड भारी । अवघें शिरीं जननीचे ॥3॥
Tuka 825
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