Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
अनुतापें दोष । जाय न लगतां निमिष ॥1॥ परि तो राहे विसावला । आदीं अवसानीं भला ॥ध्रु.॥ हें चि प्रायिश्चत । अनुतापीं न्हाय चित्त ॥2॥ तुका ह्मणे पापा । शिवों नये अनुतापा ॥3॥
Tuka 724
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