Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
द्वेषाचिया ध्यानें हरिरूप जाले । भाव हारपले देहादिक॥1॥ देहादिक कर्में अभिमान वाढे । तया कंसा जोडे नारायण ॥2॥ नारायण जोडे एकविध भावें । तुका ह्मणे जीवें जाणें लागे ॥3॥
Tuka 4562
Audio
Translations & commentaries(0)
No translations available for this verse yet.