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Tukaram Abhangs (Gatha)

तुकाराम गाथा

मूल श्लोकः

अल्ला देवे अल्ला दिलावे अल्ला दारु अल्ला खलावे । अल्ला बगर नही कोये अल्ला करे सो हि होये ॥१॥ मर्द होये वो खडा फीर नामर्दकुं नहीं धीर । आपने दिलकुं करना खुसी तीन दामकी क्या खुमासी ॥ध्रु.॥ सब रसोंका किया मार । भजनगोली एक हि सार । इमान तो सब ही सखा । थोडी तो भी लेकर ज्या ॥२॥ जिन्हो पास नीत सोये । वो हि बसकर तिरोवे । सांतो पांचो मार चलावे । उतार सो पीछे खावे ॥३॥ सब ज्वानी निकल जावे । पीछे गधडा मटी खावे । गांवढाळ सो क्या लेवे । हगवनि भरी नहि धोवे ॥४॥ मेरी दारु जिन्हें खाया । दिदार दरगां सो हि पाया । तल्हे मुंढी घाल जावे । बिगारी सोवे क्या लेवे ॥५॥ बजारका बुझे भाव । वो हि पुसता आवे ठाव । फुकट बाटु कहे तुका । लेवे सोहि लें हिसखा ॥६॥ ॥१॥ गोंधळ - अभंग ३

Tuka 444

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