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Tukaram Abhangs (Gatha)

तुकाराम गाथा

मूल श्लोकः

तम भज्याय ते बुरा जिकीर ते करे । सीर काटे ऊर कुटे ताहां सब डरे ॥१॥ ताहां एक तु ही ताहां एक तु ही । ताहां एक तु ही रे बाबा हमें तुम्हें नहीं ॥ध्रु.॥ दिदार देखो भुले नहीं किशे पछाने कोये । सचा नहीं पकडुं सके झुटा झुटे रोये ॥२॥ किसे कहे मेरा किन्हे सात लिया भास । नहीं मेलो मिले जीवना झुटा किया नास ॥३॥ सुनो भाई कैसा तो ही । होय तैसा होय । बाट खाना आल्ला कहना एकबारां तो ही ॥४॥ भला लिया भेक मुंढे । आपना नफा देख । कहे तुका सो ही संका । हाक आल्ला एक ॥५॥ ॥१॥ मलंग - अभंग १

Tuka 441

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