Sant Seva ParishadSant Seva ParishadSSP · sant seva

Tukaram Abhangs (Gatha)

तुकाराम गाथा

मूल श्लोकः

सब संबाल भ्याने लौंढे खडा केऊं गुंग । मदिरथी मता हुवा भुलि पाडी भंग ॥१॥ आपसकुं संबाल आपसकुं संबाल । मुंढे खुब राख ताल । मुथिवोहि बोला नहीं तो करूँगा हाल ॥ध्रु.॥ आवलका तो पीछें नहीं मुदल बिसर जाय । फिरते नहीं लाज रंडी गधे गोते खाय ॥२॥ जिन्हो खातिर इतना होता सो नहीं तुझे बेफाम । उचा जोरो लिया तुंबा तुंबा बुरा काम ॥३॥ निकल जावे चिकल जोरो मुंढे दिलदारी । जबानीकी छोड दे बात फिर एक तारी ॥४॥ कहे तुका फिसल रुका मेरेको दान देख । पकड धका गांडगुडघी मार चलाऊं आलेख ॥५॥

Tuka 439

Audio
Translations & commentaries(0)

No translations available for this verse yet.