Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
संबाल यारा उपर तलें दोन्हो मारकी चोट । नजर करे सो ही राखे पश्वा जावे लुट ॥१॥ प्यार खुदाई रे बाबा जिकिर खुदाई ॥ध्रु.॥ उडे कुदे ढुंग नचावे आगल भुलन प्यार । लडबड खडबड कांहेकां खचलावत भार ॥२॥ कहे तुका चलो एका हम जिन्होंके सात । मिलावे तो उसे देना तो ही चढावे हात ॥३॥
Tuka 438
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