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Tukaram Abhangs (Gatha)

तुकाराम गाथा

मूल श्लोकः

रH श्वेत कृष्ण पीत प्रभा भिन्न । चिन्मय अंजन सुदलें डोळां ॥1॥ तेणें अंजनगुणें दिव्यदृिष्ट जाली । कल्पना निवाली द्वैताद्वैत ॥ध्रु.॥ देशकालवस्तुभेद मावळला । आत्मा निर्वाळला विश्वाकार ॥2॥ न जाला प्रपंच आहे परब्रह्म । अहंसोहं ब्रह्म आकळलें ॥3॥ तkवमसि विद्या ब्रह्मानंद सांग । तें चि जाला अंगें तुका आतां ॥4॥

Tuka 4290

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