Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
गोपीचंदन मुद्रा धरणें । आह्मां लेणें वैष्णवां ॥1॥ मिरवूं अळंकार लेणें । हीं भूषणें स्वामीचीं ॥ध्रु.॥ विकलों ते सेवाजीवें । एक्या भावें एकविध ॥2॥ तुका ह्मणे शूर जालों । बाहेर आलों संसारा ॥3॥
Tuka 4234
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