Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
जरि न भरे पोट । तरि सेवूं दरकूट ॥1॥ परि न घलूं तुज भार । हा चि आमुचा निर्धार ॥ध्रु.॥ तुझें नाम अमोलिक। नेणती हे ब्रह्मादिक ॥2॥ ऐसें नाम तुझें खरें । तुका ह्मणे भासे पुरें॥3॥
Tuka 3938
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