Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
हरिबिन रहियां न जाये जिहिरा । कबकी थाडी देखें राहा ॥१॥ क्या मेरे लाल कवन चुकी भई । क्या मोहिपासिती बेर लगाई ॥ध्रु.॥ कोई सखी हरी जावे बुलावन । बार हि डारूं उसपर तन ॥२॥ तुका प्रभु कब देखें पाऊं । पासीं आऊं फेर न जाऊं ॥३॥
Tuka 382
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