Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
एक परि बहिर बरें । परि तीं ढोरें ग्यानगडें ॥1॥ कपाळास लागली अगी । अभागी कां जीतसे ॥ध्रु.॥ एक परि बरें वेडें । ताकिऩक कुडें जळो तें ॥2॥ तुका ह्मणे खातडवासी । अमृतासी नोळखे ॥3॥
Tuka 3666
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