Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
पािळतों वचन । परि बहु भीतें मन ॥1॥ करितें पायांशीं सलगी । नये बैसों अंगसंगीं ॥ध्रु.॥ जोडोनियां कर । उभें असावें समोर ॥2॥ तुका ह्मणे संत । तुह्मी मी बहु पतित ॥3॥
Tuka 3533
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