Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
काहे लकडा घांस कटावे । खोद हि जुमीन मठ बनावे ॥1॥ देवलवासी तरवरछाया । घरघर माइऩ खपरिबसमाया॥ध्रु.॥ कां छांडियें भार फेरे सीर भागें । मायाको दुःख मिटलिये अंगें॥2॥ कहे तुका तुम सुनो हो सिद्धा । रामबिना और झुटा कछु धंदा ॥3॥
Tuka 3496
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