Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
वचन तें नाहीं तोडीत शरीरा । भेदत अंतरा वज्रा- ऐसें ॥1॥ कांहीं न सहावें काशा करणें । संदेह निधान देह बळी॥ध्रु.॥ नाहीं शब्द मुखीं लागत तिखट । नाहीं जड होत पोट तेणें ॥2॥ तुका ह्मणे जरी गिळे अहंकार । तरी वसे घर नारायण॥3॥
Tuka 2430
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