Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
सर्वथा ही खोटा संग । उपजे भंग मनासी ॥1॥ बहु रंगें भरलें जन । संपन्न चि अवगुणी ॥ध्रु.॥ सेविलिया निःकामबुद्धी। मदें शुद्धी सांडवी ॥2॥ त्रासोनियां बोले तुका । आतां लोकां दंडवत ॥3॥ ॥5॥
Tuka 2193
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